





50 वर्षों से चली आ रही परंपरा, राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
बीकानेर। शरद पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, गंगाशहर में सोमवार को औषधियुक्त खीर वितरण समारोह आयोजित किया गया। भगवान धन्वंतरि और हनुमानजी की विशेष पूजा-अर्चना के बाद 200 से अधिक लोगों को निःशुल्क खीर का प्रसाद वितरित किया गया। केंद्र में सुबह 7:30 बजे से ही प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गईं।
संस्था के उपाध्यक्ष श्रीभगवान अग्रवाल ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार शरद पूर्णिमा पर औषधियुक्त खीर का प्रसाद ग्रहण करने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि संस्था में इस परंपरा का निर्वहन पिछले 50 वर्षों से किया जा रहा है। मान्यता है कि इस अवसर पर खीर को चांदनी में रखने से उसके औषधीय गुणों का लाभ मिलता है। इसे दमा और श्वांस संबंधी रोगों से राहत की पारंपरिक पद्धति से भी जोड़कर देखा जाता है।
संस्था के मंत्री बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि परंपरागत मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर शरीर को ठंडक पहुंचाने और पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने की परंपरा प्राकृतिक चिकित्सा की मान्यताओं से जुड़ी हुई है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे।
कार्यक्रम में पंडित शिवानंद पारीक ने पूजा-अर्चना करवाई। इस दौरान संस्था के उपाध्यक्ष श्री श्री भगवान अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य संतोष व्यास, समाजसेवी प्रेमरतन अग्रवाल तथा संस्थान के महावीर प्रसाद उपाध्याय, शंकरलाल पड़िहार, कविता सुथार, सुनीता प्रजापत, कृष्णा कच्छावा, मयंक बोथरा और कुनाल तंवर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



