



नागौर : ढोल की थाप व डीजे की धुन पर गांवों में हो रही है फसल कटाई
नागौर // जिला मुख्यालय के अनेक निकटवर्ती गांवों में इस समय सामूहिक खेती जोरों पर है। बरसात की संभावना को देखते हुए लोगों के द्वारा एक दूसरे का सहयोग करते हुए बाजरे की कटाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कटाई के काम को जल्दी पूरा करने के लिए सामूहिक खेती ढोल की थाप व डीजे की धुन पर की जा रही है। नागौर के जिले के निकटवर्ती गांव बाराणी में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जहां महिला व पुरुषों द्वारा ढोल की थाप पर हरजस, भजन कीर्तन करते हुए बाजरे की कटाई हुई। ब गांव के नारायण गोदारा के खेत में महिला और पुरुषों ने इस काम में उत्साह दिखाते हुए सामूहिक खेती की परंपरा को पुनर्जीवित किया।
इसी प्रकार ग्राम रातड़ी के देवाराम जांगू, चंपाराम, राजाराम जांगू अध्यापक के यहां फार्म हाउस पर दिन में खेती में सामूहिक कार्य हुआ।इस परंपरा जिसको सांडा या लाह कहते हैं जिसमें बिना नगद मजदूरी के आपस में एक दूसरे की प्रेम और भावना को समझते हुए सहयोग किया जाता है। इस दौरान मेहमान किसानों का मेजबान किसान की ओर से बहुत अच्छा मान सम्मान और खातिरदारी की जाती है। इस परंपरा की मिसाल को कायम रखते हुए यहां पर लगभग 40 आदमियों जिसमें मातृशक्ति की भी अच्छी मौजूदगी रही, ने सामूहिक रूप से खेत में कडब काटने का कार्य किया जो एक पुरानी परंपरा का अनूठा उदाहरण है। इस परंपरा के अनुसार किसी भी बड़े किसान या आपस में किसी भी किसान के कोई भी खेती का काम यदि पीछे रह जाता है तो एक दूसरे किसान मिलकर के एक दूसरे की सहयोग की भावना से काम करते हुए सहयोग करते हैं ऐसी परंपरा रही है। रातड़ी के आसपास गांव जैसे अलाय, बाराणी, गोगानाडा, थलांजू, कालडी आदि गांव के लोग इस प्रकार की कुछ परंपरा अभी भी निभा रहे हैं जिसमें एक दूसरे का सहयोग करते हुए यह कार्य किया जाता है जो किसानों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता है ।
खेती के काम को इस प्रकार जब सामूहिकता से करते करते हैं तो किसान प्रातःकाल जल्दी ही काम पर लग जाते है। इस दौरान काम करते वक्त ढोल पर नृत्य भी करते हैं जिनको डोका डांस भी कहते हैं। यह भी एक हमारे यहां मारवाड़ की अंगूठी संस्कृति और परंपरा रही है।
रातड़ी के बड़े किसान लादूराम और देवाराम जांगू ने बताया कि रातङी के फार्म हाउस पर इस प्रकार का सामूहिक कार्य किया गया जिसमें सभी लोगों ने आपस में सहयोग करते हुए इस काम को करवाया जिसमें बड़ी मात्रा में लोगों ने सामूहिक रूप से भाग लिया किया जिनमें दुलाराम हुड्डा, सुगनाराम सियाग, पोकरराम जांगू, रामूराम जांगू, हरेंद्र धुंधवाल, कुंभाराम सारण, मुकनाराम बाना, भंवर सारण, नेमाराम जांगू, भगीरथ हुड्डा, केशुराम जांगू हनुमान खोजा, किशन जांगू, जगदीश खोजा, सुनील जांगू, हेमाराम हुड्डा, मुल्तान जांगू, विशनाराम कूकणा और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी काम में सहभागिता निभाई ।



