श्रीराम-जानकी विवाह प्रसंग पर झूम उठा कथा पंडाल

धर्म-कर्म

मांगलिक भजनों, गीतों और नृत्यों से सजा श्री रामकथा अमृतोत्सव

सीताराम गेट के अंदर स्थित सीताराम भवन में आयोजित श्री रामकथा अमृतोत्सव में बुधवार को श्रीराम-जानकी विवाह प्रसंग श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। कथा पंडाल में सचेतन झांकियों, मांगलिक गीतों, भजनों और पारंपरिक नृत्यों की विशेष धूम रही। विवाह प्रसंग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे।

झांकियों में विभिन्न पात्रों की भूमिका कथा आयोजनकर्ता पुष्पा देवी सोमानी एवं स्वर्गीय सीताराम सोमानी के परिजनों द्वारा निभाई गई। आयोजन समिति के अनुसार कथा का आयोजन 24 मई तक प्रतिदिन दोपहर साढ़े बारह बजे से शाम सवा तीन बजे तक तथा शाम चार बजे से सात बजे तक नियमित रूप से जारी रहेगा।

कथावाचक पंडित पुरुषोतमजी व्यास ‘मीमांसक’ ने रामचरित मानस के बालकांड में वर्णित माता सीता स्वयंवर प्रसंग का रसपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता सीता द्वारा देवी पार्वती की स्तुति एवं गौरी वंदना “जय-जय गिरवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद चकोरी” का भावपूर्ण गायन करते हुए कहा कि परिणय संस्कार को कभी मजाक में नहीं लेना चाहिए। विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों से जुड़ा पवित्र संस्कार है।

उन्होंने कहा कि विवाह संस्कार के नियमों और मर्यादाओं का पालन करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय और समृद्ध बनता है। जिन कन्याओं को योग्य वर एवं उत्तम परिवार की कामना हो, वे श्रद्धा के साथ गौरी वंदना करें तो उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

कथा के दौरान उन्होंने रामचरित मानस की अनेक प्रसिद्ध चौपाइयों और दोहों जैसे —
“सिय सुंदरता बरनि न जाई…”,
“सीय राममय सब जग जानी…”,
“मंगल भवन अमंगल हारी…”
का मधुर वाचन किया। साथ ही मंत्र “ऊँ श्री रामचन्द्र सीता हितायै नमः” का उच्चारण भी करवाया।

पंडित पुरुषोतमजी व्यास ‘मीमांसक’ ने कहा कि रामचरित मानस एवं वैदिक ग्रंथों की चमत्कारी चौपाइयों, दोहों और मंत्रों का श्रद्धापूर्वक गायन करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है, अविवाहित युवक-युवतियों के विवाह योग प्रबल होते हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने गणगौर, विवाह एवं पारंपरिक राजस्थानी, मैथिली और हिन्दी मांगलिक गीतों पर सामूहिक स्वर मिलाए तथा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।