श्रीमद्भागवत कथा में धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव, गुलाब की पंखुड़ियों से महका पांडाल

धर्म-कर्म

सरला देवी पुरोहित (माँ) चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, माखन-मिश्री और लस्सी का हुआ वितरण

गंगाशहर, 20 मई। सरला देवी पुरोहित (माँ) चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन उपलक्ष्य में गोपेश्वर बस्ती स्थित श्री गोपेश्वर विद्यापीठ के पास आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को कथा स्थल अलौकिक आनंद से सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर पूरी भव्यता और हर्षोल्लास के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। नंदलाल के प्राकट्य की घोषणा होते ही पूरा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा।

आकर्षण का केंद्र रहीं जीवंत झांकियां, थालियां बजाकर मनाया उत्सव
कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान कथा स्थल को विशेष और भव्य रूप से सजाया गया था। इस अवसर पर मनमोहक और विभिन्न धार्मिक झांकियां सजाई गईं। उत्सव का विशेष आकर्षण नन्हें-मुन्ने बच्चे रहे, जो भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप में सज-धजकर कथा में पहुंचे। जैसे ही वासुदेव जी कन्हाई को टोकरी में लेकर पांडाल में प्रवेश कर रहे थे, वैसे ही आसपास के घरों में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार थालियां बजाकर कन्हैया के जन्म का स्वागत किया।

गुलाब के फूलों की वर्षा और माखन-मिश्री का प्रसाद
ट्रस्ट द्वारा इस पावन वेला को यादगार बनाने के लिए गुलाब के पुष्पों की वर्षा की विशेष व्यवस्था की गई थी। भगवान के जन्म लेते ही पूरे पांडाल में इस कदर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई गईं कि चारों तरफ फूलों का कालीन बिछ गया और माहौल सुगंधित हो उठा। जन्मोत्सव की खुशी में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन होकर जमकर झूमे और नाचने लगे। इस दौरान ट्रस्ट की ओर से सभी भक्तों को भगवान के प्रिय भोग माखन-मिश्री एवं ठंडी लस्सी का प्रसाद वितरित किया गया।

भागवत महापुराण साक्षात ईश्वर का वांग्मय स्वरूप हैं,
कथा व्यास और प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ पं. विजेंद्र व्यास ने अत्यंत सरल, सहज और मर्मस्पर्शी भाषा में भागवत महापुराण की विवेचना की। उन्होंने कृष्ण जन्म के आध्यात्मिक रहस्यों को समझाते हुए कहा कि “श्रीमद्भागवत गीता और भागवत महापुराण साक्षात ईश्वर का वांग्मय स्वरूप हैं, जो मनुष्य के कल्याण का एकमात्र मंत्र है। जिस मनुष्य पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा हो जाती है, उसका मानव जीवन सफल और धन्य हो जाता है। भगवान केवल भाव के भूखे हैं।”

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से छोटा पड़ा पांडाल
पुरुषोत्तम मास के पुण्यकाल और कृष्ण जन्मोत्सव के महासंयोग के कारण बुधवार को कथा सुनने के लिए गंगाशहर और आसपास के क्षेत्रों से इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे कि कथा का सुव्यवस्थित पांडाल भी छोटा पड़ गया। पैर रखने तक की जगह नहीं होने के बावजूद भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था।

व्यवस्थाओं में जुटे समर्पित कार्यकर्ता
कथा के इस भव्य और सफलतम आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सरला देवी पुरोहित (माँ) चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यकर्ता दिन-रात जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। व्यवस्थाओं को संभालने में महेंद्र (मीनू) विजय कुमार, महेंद्र (सिम्मी) सुरेंद्र (सोनू) एवं तुलसीराम, पींकू, मुन्ना, डिस्को, पिंटू सहित ट्रस्ट के तमाम सेवादार अपनी अग्रिम भूमिका निभा रहे हैं। ट्रस्ट ने कथा के आगामी दिनों में भी सभी धर्मप्रेमियों से इसी प्रकार भाव से पधारने का आह्वान किया है।